
दिल्ली की नीली
बस में चढ़ गईं
दो छात्राएं
जिनके गाल लाल
आंए दांए बांए
देखकर बोली पहली।
टिकट नहीं लेते हैं
खचाखच भरी बस है
खूब भीड़ है
मालूम भी नहीं चलेगा
दस का पूरा नोट बचेगा।
दूसरी ने की आपत्ति
नहीं, सखि री नहीं
रहना चाहिए ईमानदार
ईमानदार पर ईश्वर भी
लुटाता है ढेर सारा प्यार।
और भीड़ में उसने
दिए रुपये दस
मांगी टिकट दो
कंडक्टर बोला लो।
गलती से थमाए
चार दस के नोट
और टिकट दो।
दूसरी ने सिर हिलाया
पहली को समझाया
ईमानदारी का मतलब
अब समझ में आया।
अब पहली बोली
चालीस वापिस करो
पूरी ईमानदार बनो।
दूसरी ने राज खोला
बिना मुंह खोले बोला
ईमानदार तो हूं
पर बेवकूफ नहीं।



17 comments:
होशियार लोग आज कल दूसरों के बेवकूफी से मौज मे रहते है,
कंडक्टर रहा बेवकूफ़,
लड़की निकली होशियार,
जब इस बिना कुछ ग़लत किए हो फ़ायदा तो
बिना वजह क्यों बने ईमानदार,
बढ़िया ..बहुत बढ़िया...धन्यवाद!!!
बहुत बढ़िया :)
वैसे आजकल इमानदारी का दूसरा नाम बेवकूफी ही है.
main bhi aise kayi "samajhdaro" se mil chuka hoon...
www.baharhaal.blogspot.com
main bhi aise kayi "samajhdaro" se mil chuka hoon...
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achcha likha hai aur sachcha likha hai.
कुछ लोग ऐसे ही ईमानदार होते हैं।
छा गये आप!
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पढ़िए: सबसे दूर स्थित सुपरनोवा खोजा गया
sahi hai had se jyaada imaandaari bewkufi hi kahlayegi chup chaap note jeb me daal|
सैयद जी की बात से पूर्णत्या सहमत
vaah bahut hee badhiya...
जिस दुकान पर रोज सामान लेते हैं, वहाँ ईमानदार बने रहने मे ज्यादा भलाई लगती है...
कविता अच्छी बनी है चाचा जी... लिखते रहिये और हंसते रहिये
शानदार्।ईमानदारी की इससे बेहतर परिभाषा हो ही नही सकती।
बहुत खूब
ईमानदारी को कल कुछ लोग वारंट लेकर खोज रहे थे ..आपका पता दे दूं ..??
ईमानदार वो होता है जिसे बेईमानी करने का मौका न मिला हो :)
सच में इस दुनिया में ईमानदारी को बेवकूफी ही तो माना जाता है....
www.nayikalm.blogspot.com
duniya me bahut log imandar hai
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