एक ग़ज़ल : वह उसूलों पर चला है......
वह उसूलों पर चला है उम्र भर
साँस ले ले कर मरा है उम्र भर
जुर्म इतना है खरा सच बोलता
कटघरे में जो खड़ा है उम्र भर
पात केले की तरह संवेदना
वो बबूलों पर टंगा है उम्र भर
मुख्य धारा से अलग धारा रही
अपनी दुनिया में जिया है उम्र भर
घाव दिल के जो दिखा पाता अगर
स्वयं से कितना लड़ा है उम्र भर
राग दरबारी नहीं है गा सका
इस लिए सूली चढ़ा है उम्र भर
-आनन्द
15 comments:
मुख्य धारा से अलग धारा रही
अपनी दुनिया में जिया है उम्र भर
घाव दिल के जो दिखा पाता अगर
स्वयं से कितना लड़ा है उम्र भर
bahut sunder kavita!
बहुत ही बढ़िया पोस्ट| धन्यवाद|
ati-sundar... thank you so much for providing...
एक बहुत तीखी और बेहतरीन ग़ज़ल....
Sir ,you have projectid a common feeling of this era .Few of us are really like this .They die to live every moment .
gazal likhi aapne hai ,bhogi maine bhi hai .sahbhoktaa rhaan hoon aapki samvednaaon ,anubhav ke daayron kaa .
veerubhai
09350986685
कुछ शे'र उद्धृत करना चाहता था, परन्तु मन नहीं माना..........
मैं न्याय नहीं कर पाता यदि किसी खास शे'र को चुनता..........
बस तहेदिल से मुबारकबाद आपको इस नायब ग़ज़ल के लिए जिसके सभी शे'र बहुत ख़ूब हैं......
आपकी जय हो !
रचना बहुत अच्छी लगी./....
बहुत ख़ूब !
राग दरबारी नहीं है गा सका
इस लिए सूली चढ़ा है उम्र भर
बहुत सुन्दर ..जो सच बोले आज के ज़माने में उसे सूली ही नसीब होती है
जुर्म इतना है खरा सच बोलता
कटघरे में जो खड़ा है उम्र भर
राग दरबारी नहीं है गा सका
इस लिए सूली चढ़ा है उम्र भर
बहुत बढ़िया....
चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 14 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया
http://charchamanch.blogspot.com/
रागदरबारी नहीं जो गा सका; चढ़ता रहा है सूलियां उम्र भर...बड़े यथार्थ भाव हैं।
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
जुर्म इतना है खरा सच बोलता
कटघरे में जो खड़ा है उम्र भर
पात केले की तरह संवेदना
वो बबूलों पर टंगा है उम्र भर
Wah kya sher hain tareef ke liye shabd nahee hain.
आ० अन्जना जी/पटाली जी/पूजा जी/राणा जी/वीरू भाई जी/अलबेला खत्री जी/जनाब महफ़ूज़ अली /गोदियाल साहेब /संगीता जी /राजीव तनेजा जी/राजे शा जी/हास्य फुहार जी/आशा जोगलेकर जी एवं अन्य मित्र गण
उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
संगीता जी का विशेष रूप से कि इस ग़ज़ल को अपने ब्लाग चर्चा के लिए विशेष रूप से चयन किया
सादर
---आनन्द.पाठक
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